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अपने देश का प्रतिनिधित्व करना ,कोई लक्ष्य बनाना और उसके लिए जी जान से जुट जाना , प्रतिभाशाली साथियों का साथ होना ,एक अनुभवी और योग्य प्रशिक्षक का होना , समय आने पर अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करना ,दबाव के लम्हो में भी खुद पर भरोसा रखना ,खेल की हर चाल का आनंद उठाना ,हार जीत की भावना से परे अपने प्रतिद्वंदी का भी सम्मान करना और अपना सर्वश्रेस्ठ देने की कोशिश करना । अगर परिणाम को एक तरफ रखकर हम सोचे तो इस पैमाने पर 176 देशो से आए वह सभी 2245 खिलाड़ी ही बाकू के विजेता है ,पदक तो सिर्फ यह बताने के लिए है की किसने सबसे ज्यादा मेहनत की पर इससे जो नहीं जीते उनका महत्व कम नहीं हो जाता ,उन सभी खिलाड़ियों के एक साथ एक जगह होने से जो विश्व भर की विभिन्न संस्कृतियों का आपस में मेलजोल हुआ ,जिस प्रेम और मुस्कान का आदान प्रदान हुआ वह अमूल्य है और दरअसल सही मायनों मैं बाकू नें इन सभी पैमानो पर अपना नाम सर्वश्रेस्ठ ओलंपिक के तौर पर सभी के दिलो में अंकित कर लिया , अंतिम दो चक्रो में भारतीय टीम नें दो ड्रॉ खेले और हम पुरुष वर्ग में चौंथे और पांचवे स्थान पर रहे । ये भी क्या कम है !!भविष्य हमारा है !!
42वें विश्व शतरंज ओलंपियाड में शुरुआत से ही भारतीय पुरुष टीम नें गज़ब का खेल दिखाया है पर 9वे चक्र में भारतीय महिला टीम नें देश को गर्व करने के पल दिये और पिछले दो मैच जीतकर रफ्तार पकड़ ली है । हरिका ,तनिया और सौम्या नें अच्छा खेल दिखाते हुए जीत दर्ज की कुल मिलाकर बाकू में आज का दिन भारत के लिए खुशियाँ और गम दोनों लेकर आया ,भारतीय महिला टीम नें नीदरलैंड को 3-1 से पराजित कर जैसे अपनी आखिरी ट्रेन पकड़ ली और एक बार फिर से पदक की दौड़ में लौट आई जबकि पुरुष टीम का जायका उक्रेन की टीम नें बिगाड़ दिया और दो चक्र पूर्व बढ़त पर चल रही भारतीय टीम छठे स्थान पर सरक गई अगला चक्र विश्व नंबर एक टीम रूस से है और भारत के लिए स्थति "करो या मरो " की आ चुकी है अगर पदक जीतना है तो रूस की दीवार भेदनी ही होगी ,और शायद आज टीम को विदित या हरिकृष्णा से बड़ी जीत की जरूरत है । वंही महिला टीम के पास आज उक्रेन से हिसाब बराबर करने को मौका होगा !
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती ,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती !! ये बात मौजूदा भारतीय शतरंज टीम पर बिलकुल सटीक बैठती है , 42वें शतरंज ओलंपियाड में भारत नें पिछले दो चक्रो में पहले हार का सामना किया और फिर जीत का स्वाद भी चखा पर इन दो चक्रो में कोई खिलाड़ी अगर दुनिया भर की नजर में आ गया तो वो है भारत के एसपी सेथुरमन ! उन्होने सारी दुनिया से एक भारतीय के गुणो का परिचय करा दिया । सातवें चक्र की हार के बाद जंहा लोग इस हार के लिए उनकी जीती बाजी गवाने को जिम्मेदार ठहरा रहे थे वो दुनिया से बेखबर अपने आपको और बेहतर करने की तैयारी में खोये हुए थे ,हम यंहा गलतियों ढूंढ रहे थे वो अपने आप पर भरोसे को और मजबूत बना रहे थे और आठवें चक्र भारत का यह धूमकेतु फिर चमका और भारत नें अंग्रेज़ो को 2.5-1.5 से हराकर पुनः सयुंक्त बढ़त बना ली । आने वाले तीन चक्र भारत के नाम होंगे यही उम्मीद है ..
"जो बात पहली बार होती है "दरअसल वो उससे पहले कभी नहीं हुई होती है ,कल जैसे है 42वें विश्व शतरंज ओलंपियाड में भारत के अधिबन के खिलाफ हार स्वीकार करते हुए नीदरलैंड के अनुभवी ग्रांड मास्टर लामी एरविन नें हाथ आगे बढ़ाया वह सिर्फ एक साधारण जीत का लम्हा नहीं था वो था शतरंज खेल के जनक इस देश के दुनिया में सबसे आगे होने ,विश्व भर के सामने भारत की क्षमता साबित करने और हर भारत वासी का सिर गर्व से ऊंचा करने का भी लम्हा था ! भारत नें पहले बोर्ड पर मुश्किल लग रहे मैच में जोरदार वापसी की और अनुभवी नीदरलैंड युवा भारत से परास्त हो गया यह गिरकर भी उठ जाने की ताकत ही आपको सबसे बेहतरीन बनाती है और भारतीय टीम इसकी माहिर नजर आ रही है , महिलाओं में हरिका की वापसी सिर्फ राहत ही नहीं लातविया के ऊपर जीत और पदक की उम्मीद भी वापस ले आई !!
आ गए हरीकृष्णा ! क्या बात है ! कहते है बड़े खिलाड़ी बड़े मौको पर ही वापसी करते है और खुलकर सामने आते है ! बिलकुल सही समय चुना हरीकृष्णा नें अपना बेहतरीन देने का और साथ ही वाह विदित ! वाह !! क्या खेल रहे है आप !बाकू 42वें शतरंज ओलंपियाड में भारत नें जिस अंदाज में पिछले दो चक्रो में जीत दर्ज की है पहले क्यूबा और फिर खासतौर पर मेजबान अजरबैजान के खिलाफ उससे भारत का आत्मविश्वास तो बढ़ा ही है विरोधियों की नींद भी उड़ गयी है । भारत अब वंहा पहुँच गया है जंहा से 3-4 मैच की जीत उसे वो स्थान दिला सकती है जंहा पहुँचना हर देश का सपना होता है । खैर सपने सच करने का यदि कोई तरीका है तो वो है अपना सर्वश्रेष्ठ करना और यही भारत की टीम कर रही है !! और आप और हम उनकी जीत के लिए प्रार्थना तो कर ही रहे है ..
बेहतरीन विदित ,अद्वीतीय अधिबन ,प्रभावशाली पदमिनी , तजुर्बेकार तनिया और शानदार सौम्या के दम पर आज भारत नें बाकू अजरबैजान में चल रहे 42वें शतरंज ओलंपियाड में तीसरे दिन लगातार तीसरी जीत दर्ज की और एक बेहतरीन नीव की स्थापना कर दी है । फिलहाल अब तक भारतीय टीम का प्रदर्शन विश्व स्तरीय रहा है और टीम अगर बड़े मैच में भी यही जोश और जज्बा दिखा पाई तो भारत बाकू में एक नया इतिहास रच सकता है यह पहला मौका है जब भारत की दोनों महिला और पुरुष टीमों नें ओलंपियाड के शुरुआत में लगातार तीन मैच साथ में जीते है । पर इस अच्छे परिणाम के बाद भी एक बात साफ है की भारत के प्रमुख खिलाड़ी हरिकृष्णा और हरिका को समय से लय पकडनी होगी और बड़े मैच में टीम का नेतृत्व करना होगा अगर हमें बाकू में भारत का तिरंगा लहराना है तो इन दोनों का अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है
तरह तरह की संस्कृतियों का मिलन , ना रंगो का भेद ,न भाषा की परेशानी ,ना खो जाने का डर ,बस हर तरफ मुस्कराते चेहरे , सच पूछो तो बाकू नें इस शतरंज के इस सबसे बड़े आयोजन को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है । शतरंज के महाकुंभ में भारत नें आज लगातार दूसरी जीत दर्ज करते हुए धीरे से अपने कदम जमाने शुरू कर दिये है । भारत के लिए दूसरा दिन भी अच्छा ही साबित हुआ । पुरुष टीम नें आज कोस्टा रिका की कमजोर टीम पर शुरू से हमले किए और लगभग एकतरफा अंदाज में 4-0 से जीत दर्ज की । महिला टीम भी अपने से काफी कमजोर टीम ब्राज़ील से 3-1 से जीती तो जरूर पर विश्व नंबर 5 भारत की हरिका द्रोणावली का लगभग जीत चुकी बाजी समय के दबाव में गंवाना भारत के लिए एक झटका रहा हालांकि पूरी उम्मीद है हरिका अगले ही राउंड में जोरदार वापसी करेंगी ।
भारत की महिला और पुरुष दोनों टीम ने उम्मीद के अनुसार ही बाकू में पहले चक्र में 4-0 की आसान और अच्छी जीत दर्ज की है ,भले ही लोग इसे महत्वपूर्ण ना माने पर यंहा मिला एक अंक भी अंत में भारत को पदक दिलाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है । साथ ही साथ एक अच्छी शुरुआत मिलने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है , भारत ने आज अपने दोनों मुख्य खिलाड़ियों हरीकृष्णा और हरिका को विश्राम दिया था । पुरुषो नें बोलिविया को तो महिलाओं नें मेसेडोनिया पर जीत दर्ज की ,पुरुष टीम अब अगले चक्र में कोस्टा रिका से महिला टीम ब्राज़ील से अपना मुक़ाबला खेलेगी आज पढे मेरा लेख विस्तार से ..
शतरंज का खिलाड़ी भारत का हो या अमेरिका का या फिर अफ्रीका , आस्ट्रेलिया ,चीन और रूस का ,शतरंज ओलंपियाड खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है । हर दो साल में होने वाला ओलंपियाड इस बार अजरबैजान की राजधानी बाकू में हो रहा है , यकीन मानिए मानो पूरा शहर शतरंज के खुमार में डूबा हुआ है विश्व के 176 देश इसमें प्रतिभागिता कर रहे है । 2245 खिलाड़ी अपने सपने लेकर बाकू में है कोई अपने देश के लिए मेडल जीतना चाहता है तो किसी का ग्रांड मास्टर बनने का सपना उसके साथ है तो बहुत से ऐसे भी है जो सिर्फ दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को बस एक बार मिलना चाहते है ,उस पर से बाकू कुछ ऐसी मेहमान नमाज़ी कर रहा है की जो भी वंहा है बस वंही रहना चाहता है ! यकीन मानिए इस लेख को पढ़ने के बाद आप भी बाकू का टिकट लेना चाहेंगे ।
भारत के बेहद प्रतिभाशाली ग्रांड मास्टर भास्करन अधिबन नें 23वे आबूधाबी ग्रांड मास्टर ओपन शतरंज में दूसरा स्थान हासिल करते हुए अपने खेल जीवन की सर्वोच्च अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एलो 2785 हासिल कर ली इसके साथ ही साथ वह अब विश्व रेंकिंग में 14 स्थानो की छलांग लगाकर 54वे स्थान पर पहुँच गए है और साथ ही भारत में विश्वनाथन आनंद (2776) और हरीकृष्णा (2752) के बाद तीसरे नंबर के खिलाड़ी बन गए है ।प्रतियोगिता में 32 देशो के 137 खिलाड़ी प्रतिभागिता कर रहे थे ।एक ओर अच्छी खबर ये रही की दिल्ली के निवासी और भारत के 15 वर्षीय इंटरनेशनल मास्टर आर्यन चोपड़ा ग्रांड मास्टर बनने के बेहद करीब पहुँच गए है ....पढे विस्तृत लेख